Short Biography on Dr. Rajender Parsad in hindi
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी का जीवन परिचय -:
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नमस्कार दोस्तों
आज हम बात करेंगे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी की राजेन्द्र प्रसाद जी गांधी जी के
बहुत करीबी थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाई। राजेंद्र प्रसाद ने स्वतंत्रता की
लडाई से लेकर संविधान के निर्माण तक हर जगह अपना पूरा सहयोग
दिया।
जब राजेंद्र प्रसाद पाँच साल के थे तब उनके पिता ने उन्हें फारसी सिखाने के लिए एक कुशल मुस्लिम विद्वान के पास भेजा करते थे। पारंपरिक प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने के बाद उन्हें छपरा जिले के स्कूल मे भेजा गया। उसके बाद् जून
अठारह सौ छानवे [June 1896] में बारह [12] साल की उम्र में
उनका विवाह राजवंशी देवी से हुआ।
उसके बाद वो अपने
बडे भाई महेंद्र प्रसाद के साथ दो वर्ष के लिए पटना
के T.K Ghosh Academy में पढने चले गए। इसके बाद अठारह [18]
वर्ष की उम्र में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रवेश
परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें तीस रुपए प्रतिमाह की छात्रवृत्ति
[Scholarship] भी मिलने लगी। उन्नीस सौ दो [1902] में प्रसाद जी ने Presidency College
Calcutta में दाखिला ले लिया जहां
से उन्होंने Graduation की। उन्नीस सौ सात [1907] में यूनिवर्सिटी
कोलकाता से उन्होंने Economics से M.A.
कि उपाधि प्राप्त की।
राजेंद्र प्रसाद
एक शिक्षक के रूप में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अपनी
सेवाएं दे चुके हैं। Economics में अपना M.A. पूरा करने के बाद वह मुजफ्फरपुर में Langat Singh कॉलेज में इंग्लिश के प्रोफेसर बन गए और बाद में वहाँ के
प्राचार्य भी। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी Law की पढाई के लिए कॉलेज छोड दिया और कलकत्ता में प्रवेश ले लिया।
सन् उन्नीस सौ पंद्रह [1915] में प्रसाद ने मास्टर इन Law की परीक्षा पास की और गोल्ड मेडल भी
प्राप्त किया।
उन्नीस सौ सोलह [1916] में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन के दौरान
उन्होंने महात्मा गाँधी जी से मुलाकात की।
चंपारण मिशिन के दौरान महात्मा गांधी ने उन्हें अपने स्वयं सेवकों
के साथ आने के लिए कहा। महात्मा गांधी के समर्पण, साहस और दृढ विश्वास के कारण वे उनसे
बहुत प्रभावित हुए और सन उन्नीस सौ बीस [1920] में असहयोग आंदोलन
आने के बाद प्रसाद ने आंदोलन को सहायता देने के लिए अपने वकील के
आकर्षक करियर को भी छोड दिया।
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद
को उन्नीस सौ तीस [1930] में नमक सत्याग्रह में भाग लेने के दौरान गिरफ्तार कर
लिया गया। पंद्रह जनवरी उन्नीस सौ चौंतीस [15 Jan 1934] को जब बिहार में एक नाष् कारी भूकंप आया तब वो
जेल में थे। जेल से रिहा होने के दो दिन बाद ही
राजेंद्र प्रसाद धन जुटाने और राहत के कार्यों में लग गये। राहत का
कार्य जिस तरह से व्यवस्थित किया गया था उसने डॉक्टर राजेंद्र
प्रसाद के कौशल को साबित किया। इसके तुरंत बाद डॉक्टर राजेंद्र
प्रसाद को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन के
लिए अध्यक्ष चुना गया।
उन्हें उन्नीस सौ उनचालीस [1939] में नेताजी
सुभाषचंद्र बोस के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष के
रूप में निर्वाचित किया गया। उन्नीस सौ बयालीस [1942]
में भारत छोडो आंदोलन में उन्होंने भाग लिया जिस दौरान वे गिरफ्तार
हुए और उन्हे नजरबंद रखा गया।
जुलाई उन्नीस सौ छियालीस [July 1946] को जब संविधानसभा को भारत के संविधान के कठिन कार्यो
की जिम्मेदारी सौंपी गई तब डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद
को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संविधान निर्माण में
भीमराव अंबेडकर व राजेंद्र प्रसाद ने मुख्य भूमिका निभाई थी। संविधान पर हस्ताक्षर करके डॉक्टर प्रसाद ने ही इसे मान्यता दी थी। आजादी के ढाई साल बाद छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास [ 26 ज़न
1950] को स्वतंत्र भारत का संविधान लागू किया गया और
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में
चुना गया।
राष्ट्रपति के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग
उन्होंने काफी सूझबूझ से किया और दूसरों के लिए एक नई मिसाल
कायम की। उन्नीस सौ सत्तावन [1957] में फिर राष्ट्रपति चुनाव हुए जिसमें दोबारा राजेन्द्र प्रसाद जी को राष्ट्रपति बनाया गया। ये
पहली बार था जब एक ही इंसान दो बार लगातार राष्ट्रपति बनाया गया था। राष्ट्रपति के
रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मित्रता बढाने के
इरादे से कई देशों का दौरा किया। बारह साल के कार्यकाल के
बाद वर्ष उन्नीस सौ बासठ [1962] में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद
सेवानिवृत्त हो गए और पटना चले गए जहां बिहार विद्यापीठ में रहकर जनसेवा का जीवन व्यतीत करने
लगे।
राजेंद्र प्रसाद जी ने कई किताबें भी लिखी थी। उनमें से कुछ
प्रमुख है President of Constituent Assembly, Satyagraha at Champaran [1922] , डिविजिन ओफ् इंडिया[1946], आत्मकथा [1946], बापु के कदमों में [1954], Since Independence
[1960], भारतीय शिक्षा, At The Feet Of Mahatma
Ghandhi जैसी किताबें लिखी थी।
उसके बाद् वर्ष
उन्नीस सौ बासठ [1962] में राष्ट्रपति के पद
से अवकाश प्राप्त करने पर उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान
भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। अट्ठाईस फरवरी
उन्नीस सौ तिरेसठ [28 Feb 1963] को डॉक्टर
राजेंद्र प्रसाद जी का निधन हो गया।
उनके जीवन से जुडी कई ऐसी घटनाएं है जो ये प्रमाणित करती है कि राजेंद्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के थे। भारतीय राजनीतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान
और विनम्र राष्ट्रपति कि है। पटना में प्रसाद जी की याद में राजेन्द्र स्मृति
संग्रहालय का निर्माण कराया गया है।
FAQ:
Q: डॉ राजेंद्र
प्रसाद को भारत रत्न कब मिला ?
Ans: सन 1962 में ।
Q: डॉ राजेंद्र
प्रसाद का जन्म कब हुआ था ?
Ans: डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 Dec 1884 को हुआ था।
Q: डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म कहा हुआ था ?
Ans डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के जीरादेई के इंदौर में हुआ था।
Q: डॉ राजेंद्र
प्रसाद कि मृत्यु कब हुई थी
?
Ans: 28 Feb 1963 को ।
Q: डॉ राजेंद्र
प्रसाद के बेटों का नाम क्या था ?
Ans: मृत्युंजय प्रसाद ।
Q: डॉ राजेंद्र
प्रसाद के द्वारा कोन – कोन सी किताबे लिखि गाई है ?
Ans: President of Constituent Assembly, Satyagraha at Champaran [1922] , डिविजिन ओफ्
इंडिया[1946], आत्मकथा [1946], बापु के कदमों में [1954], Since Independence
[1960], भारतीय शिक्षा, At The Feet Of Mahatma Ghandhi ।





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