Monu Goyat biography Hindi Early Life, Career, Wife, Net Worth, Lifestyle, Pkl Salary

    1. Introduction

    Monu Goyat biography

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    2. मोनू गोयत बायोग्राफी (परिचय)

     मोनू गोयत एक कबड्डी प्लेयर है, जो प्रो कबड्डी लीग में यूपी योद्धा टीम के लिए खेलते हैं। वो हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं, मोनू का जन्म साल 1992 में 16 अक्टूबर को हुआ था।  मोनू को प्रो कबड्डी लीग के सबसे बेस्ट रेडर के रूप में जाना जाता है।

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    3. मोनू गोयत का पेशेवर करियर

     मोनू गोयत एक कबड्डी प्लेयर होने के साथ-साथ इंडियन आर्मी में जूनियर कमीशंड ऑफिसर, के पद पर कायम है।  2018 में मोनू गोयत की टीम ने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।  2018-19 में मोनू प्रो कबड्डी लीग सीजन में सबसे ज्यादा कीमतमें बिकने वाले प्लेयर थे, मोनू को 1 करोड़ 51 लाख रुपये में खरीदा गया था।  पर मोनू की शुरुआत हुई थी, प्रो कबड्डी लीग सीजन 4 से, जब उन्होंने पहली बार बंगाल वॉरियर्स के लिए खेल कर, सिर्फ 13 मैच में 59 पॉइंट्स स्कोर करे, और वो उस लीग के टॉप 15 प्लेयर्स में से एक बने।  फिर 2017 में पटना पाइरेट्स के लिए खेल कर, मोनू ने सिर्फ 26 मैच में 191 रेडर्स पॉइंट हासिल किए, और इसी के साथ वो उस लीग के चौथे हाईएस्ट स्कोरिंग रेडर बने।  सीज़न 6 में हरियाणा स्टीलर्स ने मोनू को 1 करोड़ 51 लाख में ख़रीदा, और मोनू लीग में इतने हाई प्राइस में ख़रीदे जाने वाले एक मातृ खिलाड़ी बन गए, गोयत ने सुरेंद्र नाडा की अनुपस्थिति में टीम के लिए कप्तानी भी करी, और सिर्फ 20 मैच  के अंदर 160 रेडर्स पॉइंट बनाए।  उनके इंटरनेशनल करियर की बात करें तो वो 2018 के एशियन गेम्स में, ब्रॉन्ज मेडल जितने वाली इंडिया नेशनल कबड्डी टीम में भी थे।

    4. व्यक्तिगत जीवन

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     मोनू हरियाणा के भिवानी में पैदा हुए, पर उनकी लाइफ काफी स्ट्रगल भरी थी, वो एक काफी साधारण परिवार से थे, अगर सही मायने में बात करें तो वोएक बहुत ही गरीब परिवार से थे, मोनू ने केवल 10 साल की उम्र से ही कबड्डी खेलना  स्टार्ट कर दिया था।  और उनका सिर्फ कबड्डी खेलने का मुख्य कारण ये भी था कि उनके चाचा, विजेंद्र सिंह भी एक कबड्डी खिलाड़ी है, मोनू के बचपन के दोस्तों का भी कहना है कि बचपन में मोनू हमारी तरह, काफी शाररती हुआ करता था, और स्कूल से आते ही  हम खेलने के लिए निकल जाते थे, हम जब भी स्कूल जाते थे, वहां पे मोनू बस हमेशा खेलने के लिए ही कहता रहता था, और हम सब में सबसे अच्छा मोनू ही खेलता था, और मोनू के भाई तो ये भी कहते हैं कि,  मोनू गोयत पहली और दूसरी क्लास में अलग- अलग खेलो में पहला प्राइस जीतकर आए थे, खेल जैसे लंबी छलांग, ऊंची छलांग, तेज भागने का गेम इन सब में वो पहला प्राइज जीत कर आए थे, और इनके अवॉर्ड्स भी मिले थे, उनकी माता  दर्शनी देवी का तो ये भी कहना है, कि जब मोनू पहली बार पहली क्लास में जीत कर आए थे, तो उन्हें घड़ी मिली थी, और तब मोनू बहुत खुश थे, साथ में उनके परिवार की भी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

    5. परिवार का समर्थन

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    फिर जब मोनू और उनके भाई, मोनू के लिए अपने पिता, राम भगत सिंह से बात करने गए, कि मोनू कबड्डी में ही आगे भड़ा कर, इसमें अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो उनके पिता ने साफ मन कर दिया, यहां तक ​​की वो काफी  भड़के भी, किइसमें तुम अपनी क्या जिंदगी चलोगे.ना तो सरकार खेल वालों को पैसा देती है, और ना ही हर कोई खेल से अपनी जिंदगी बना पाता है।  फिर धीरे धीरे उनके पिता ने बात मान कर, मोनू का दखिला, दूसरे स्कूल में करवाया जहां, पढाई के साथ खेल कुद को भी प्रोत्साहन मिलता था,

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    मोनू ने धीरे-धीरे कबड्डी में मेडल हासिल करने शुरू कर दिए, पर सरकार की तरफ से उनको कुछ हेल्दी समान खाने को नहीं मिलता था, और जहां वो खेलने जाते थे, वह पर भी अमीर घर के बच्चों को अलग तरह रखा जाता था, जिसके  लिए मोनू को हमेशा बुरा लगता था।  फिर मोनू ने स्पोर्ट्स कोटा के जरिये आर्मी में जाने का सोचा, और 2011 में आर्मी को ज्वाइन करने के बाद, मोनू के कोच जसवीर सिंह थे, वहा मोनू ने अपने कोच से काफी चीज़ें सीखी, ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्होंनेवहां काफी दोस्त भी बनाए, और उन्होंने अपने कोच से कबड्डी के सारे तौर तरीकासीखे, पर खेलते खेलते मोनू के साथ एक गलती हो गई कि उनके पैर में मोच आ गई,जिसकी वजहसे उन्हें खेलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, पर ये परेशानी धीरे धीरे भड़ती गई, और मोनू को खेलने में काफी दिक्कत होने लगी, 

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    एक साल तक मोनू ने इस परेशानी का सामना किया, और सिर्फ एक ही पैर के साथ ट्रेनिंग करते रहे, दूसरे पैर को इस्तमाल करते हुए उन्हें काफी दिक्कत होती थी, मोनू के लिए वो समय सबसे  कठिन समय था, क्योंकि उनके साथ वाले उनसे आगे निकलते जा रहे थे, और मोनू की हालत में कोई सुधार नहीं था, फिर मोनू को डॉक्टर्स ने रेस्ट के लिए बोल दियो, थोड़े महिनो बाद मोनू ने दोबारा ट्रेनिंग करने का फैसला लिया, पर उन्हें  ट्रेनिंग के समय अपने पैर में काफी दिक्कत होती रहती थी, लेकिन इतनी परेशानी के बाद भीउनके आगे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा, उनको आर्मी की तरफ से प्रो कबड्डी में खेलने की अनुमति नहीं थी, तो उन्होंने अपनी जॉब छोड़ने का फैसला लिया, पर तब उन्हें पता चला की वो अगले वर्षप्रो  कबड्डी लीग में खेल पाएंगे, तो उन्होंने जॉब नहीं छोड़ी, लेकिन अगलेसाल, मोनू का चयन नहीं हुआ, जिस वजह से मोनू काफी मायुस हुए, पर अगले सीजन में मोनू को खेलने का मौका मिला, तो उन्होंने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। उस मैच के बाद मोनू को उनके गाँव में सब लोग जानने लग गए, उनको स्टार स्पोर्ट्स चैनल पे देख कर उनके गाँव के लोग उन्हें सेलिब्रिटी कहने लगे, और मोनू की वजह से उनके घरवालों का काफी नाम हुआ।

     6. Video



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