1. Droupadi Murmu Short Biography In Hindi
Age, Husband, Party, Family, Wiki Pedia & More
1. 1. Introduction
Droupadi Murmu कैसे बनि देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति आज इस article मे हम द्रौपदी मुर्मू कि
राष्ट्रपति बनने कि कहानि और Biography के बारे मे जानेगे और द्रौपदी मुर्मू कि income , education, पार्टी, परिवार, राजनीति , अवार्ड्स , इंटरव्यू के बारे मे भि जाने गे
2. 2. द्रौपदी मुर्मू बनि देश की राष्ट्रपति
देश के पंद्रहवें
राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वो अब
देश की अगली राष्ट्रपति बन चुकी है। विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को द्रौपदी मुर्मू
ने भारी अंतर से हराया है। Droupadi Murmu ने इस चुनाव में पहली वरीयता वाले दो
हजार आठ सौ चौबीस [2824] वोट हासिल किए।
वहीं उनके प्रतिद्वंदी यशवंत सिन्हा को प्रथम
वरीयता के एक हजार आठ सौ सतहत्तर [1877] वोट मिले। तो ऐसे
बनि द्रौपदी मुर्मू देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति
3. 3. द्रौपदी मुर्मू का प्रारंभिक जीवन
द्रौपदी मुर्मू का जन्म बीस जून उन्नीस सौ
अट्ठावन [ 20 ज़ुने 1958] को उड़ीसा के मयूरभंज जिले के बैदा पोसी गाँव में हुआ था। वो संथाल
आदिवासी समुदाय से हैं और उनके पिता बिरांची नारायण टुडू अपनी पंचायत के मुखिया रहे हैं। द्रौपदी मुर्मू कि उम्र 2022 के हिसाब से 64 वर्ष हैं। Droupadi Murmu कि लंबाई 5 फिट 5 इंच और वजन लगबग
72 किलो है मुर्मू अनुसूचित जनजाति से आति है
द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला और आदिवासी
राज्यपाल थी और अब देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति बन चुकी है। वो झारखंड में
सबसे लंबे समय तक राज्यपाल रही। उनका कार्यकाल छह साल से कुछ अधिक समय तक था। यहाँ
से सेवानिवृत्ति के बाद वो अपने गृह राज्य उडीसा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में
रहती है। ये उनके पैतृक गांव बैदा पोसी का प्रखंड मुख्यालय है।
4. 4. द्रौपदी मुर्मू कि education और करियर
द्रौपदी मुर्मू
ने अपनि प्रारंभिक पढ़ाई अपने इलाके के ही एक विद्यालय मे कि थि साल उन्नीस सौ उन्यासी [1989] में भुवनेश्वर के रमादेवी
महिला कॉलेज से बीए पास करने वाली द्रौपदी मुर्मू ने अपने पेशेवर
करियर की शुरुआत उडीसा सरकार के लिए क्लर्क की नौकरी से की थी। उस दौर में मुर्मू
सिंचाई और ऊर्जा विभाग में जूनियर सहायक थी। बाद के सालों में वो शिक्षक भी रही
मुर्मू ने रायरंगपुर के श्री अरविंदो इंटीग्रल रीसर्च सेंटर में शिक्षक के तौर पर
भी पढाया। द्रौपदी मुर्मू ने अपने करियर की शुरुआत एक वर्ड काउंसलर के तौर पर साल
उन्नीस सौ सत्तानबे [1997] में की थी।
5. द्रोपदी मुर्मू को प्राप्त पुरस्कार
द्रौपदी मुर्मू को नीलकंठ पुरस्कार प्राप्त है ये पुरस्कार उन्हे साल 2007 में प्राप्त हुआ था यह पुरस्कार उन्हे ओडिशा विधानसभा के द्वारा किया गया था
6. 6. द्रौपदी मुर्मू का राजनीति करियर और पार्टी
Droupadi Murmu ने
साल 1997 मे भारतीय जनता पार्टी जोइन कि थि साल दो हजार [2000] और दो हजार नौ [2009] में रायरंगपुर विधानसभा
सीट से बीजेपी के टिकट पर वे दो बार विधायक भी बनी। पहली बार विधायक बनने के बाद
वे साल दो हजार [2000] से दो हजार चार [2004] तक नवीन पटनायक के मंत्रिमंडल में स्वतंत्र
प्रभार के राज्यमंत्री रही। साल दो हजार पंद्रह [2015] में जब उन्हें पहली बार
राज्यपाल बनाया गया उससे ठीक पहले तक वे मयूर गंज जिले की बीजेपी अध्यक्ष थी। इसके
बाद वो झारखंड की राज्यपाल मनोनीत कर दी गई और बीजेपी की सक्रिय राजनीति से अलग हो
गई।
7. 7. द्रौपदी मुर्मू का जिवन जीवन संघर्ष
द्रौपदी मुर्मू की शादी श्यामचरण मुर्मू से हुई थी लेकिन कम उम्र में ही उनका निधन हो गया। उनकी तीन संतानें थी लेकिन इनमें से दोनों बेटों की भी असमय मौत हो गई। मुर्मू की बेटी इतिश्री मुर्मू है जो रांची में रहती है। जाहिर सी बात है कि कोई भी शख्स इतने बडे पद पर यूँ ही नहीं पहुँच जाता। उसने जिंदगी में ऐसे कई पडावों का सामना क्या होता है जिनको अगर वो शख्स पीछे मुडकर देखे तो शायद उसकी रूह कांप जाए। कुछ इसी तरह की परेशानियों का सामना करने के बाद द्रौपदी मुर्मू भी यहाँ तक पहुँची है कहा जाता है कि जिस समय द्रौपदी मुर्मू शादी करके ससुराल पहुंची थी उस वक्त उनका घर भी कच्चा था। द्रौपदी मुर्मू ने कभि हार नहीं मानी और समाज के लिए कुछ करने के लिए राजनीति में कदम रखा।
कच्ची दीवार और उसका छप्पड था। चार साल में
परिवार के तीन सदस्य कि मौत हुइ थि द्रौपदी मुर्मू ने अपनों को बहुत करीब से
बिछडते हुए देखा है। साल दो हजार दस [2010] से दो हजार चौदह [2014] तक उनके घर से तीन
अर्थियां उठी थी। इन चार सालों के भीतर उनके दो बेटे और पति की मृत्यु हो गई। बडे
बेटे की मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है। बताया जाता है कि उनकी लाश कमरे से संदिग्ध
हालत में मिली थी बडे बेटे का नाम लक्ष्मण मुर्मू था।
उनकी मौत महज पच्चीस [25] बरस की उम्र में हुई
थी। वहीं छोटे बेटे बिरंची मुर्मू की मौत एक सडक हादसे में हुई। उस वक्त बिरंची की
उम्र अट्ठाईस [28] साल थी। दुखों का सिलसिला यहीं नहीं रुका एक अक्टूबर दो हजार
चौदह [1 oct
2014] को उनके पति भी हमेशा के
लिए उनका साथ छोड कर चले गए । वही उनके शुरुआती जीवन की संघर्ष की बात करें तो
सबसे पहला दुःख उन्हें अपनी शादी के कुछ साल बाद ही मिल गया था क्योंकि उनकी पहली
संतान भी उन्हें तीन साल की उम्र में ही छोड कर चली गई ।
ये घटना साल उन्नीस सौ चौरासी [1984] की है। मुर्मू की पहली संतान एक बेटी थी।
जिंदगी में तमाम दुखों का सामना करने के बावजूद मुर्मू ने हार नहीं मानी। हालांकि
वो इस दौरान डिप्रेशन तक का शिकार रही लेकिन उनके फलादि हौसलों को कोई भी नहीं
हिला सका और इस तरह द्रौपदी मुर्मू बनि देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति
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8. FAQ:
Q: द्रौपदी मुर्मू कोन है ?
Ans: द्रौपदी मुर्मू देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति है
Q: द्रौपदी मुर्मू जन्म कब हुआ था ?
Ans: द्रौपदी मुर्मू का जन्म बीस जून उन्नीस सौ अट्ठावन [ 20 ज़ुने 1958] को हुआ था
Q: द्रौपदी मुर्मू का जन्म कहा हुआ था ?
Ans: द्रौपदी मुर्मू का जन्म उड़ीसा के मयूरभंज जिले के बैदा पोसी गाँव में हुआ था।
Q: द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति चुनाव कितनि वोटओ से जिता ?
Ans 947




